आलू उगाएँ: स्मार्ट पोषण संबंधी सुझावों के साथ
सटीक पौध पोषण से आलू की अधिक कंद उपज और उत्तम आकार प्राप्त करें।
आलू फसल में छिड़काव से जुड़ी प्रमुख समस्याएँ
१. अधिक रोग दबाव: लेट ब्लाइट और अर्ली ब्लाइट के कारण समय पर व बार-बार फफूंदनाशी छिड़काव आवश्यक होता है।
२. नीची व घनी पत्तियों वाली फसल: हाथ से छिड़काव करने पर निचली पत्तियों पर दवा समान रूप से नहीं पहुँच पाती।
३. बार-बार छिड़काव की आवश्यकता: हर ७–१० दिन में छिड़काव से श्रम और संचालन लागत बढ़ जाती है।
ट्रैक्टर से नुकसान का खतरा: खेत में ट्रैक्टर जाने से मेड़ (रिज) टूट सकती है और खुले कंद (ट्यूबर) क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
आलू फसल की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था : कंद बनने की शुरुआत → कंद विकास अवस्था
आलू फसल के लिए सर्वाधिक आवश्यक पोषक तत्व व सूक्ष्म पोषक तत्व : पोटैशियम, जिंक
आलू के लिए पोटैशियम और जिंक क्यों अत्यंत आवश्यक हैं
१. कंद का भराव (ट्यूबर बल्किंग), आकार और वजन बढ़ाते हैं।
२. स्टार्च संचय और गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
३. रोग प्रतिरोधक क्षमता और तनाव सहनशीलता बढ़ाते हैं।
४. कंद की त्वचा की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता बेहतर बनाते हैं।
आलू छिड़काव में कृषि ड्रोन की भूमिका
१. घनी आलू फसल के ऊपर समान और प्रभावी छिड़काव।
२. डाउनड्राफ्ट प्रभाव से निचली पत्तियों तक दवा की बेहतर पहुँच।
३. मेड़ या कंद को कोई नुकसान नहीं।
४. श्रम लागत में ६०–७०% तक की बचत।
५. पानी की खपत में ८०–९०% तक की कमी।
फसल की अवस्था – प्रमुख पोषक तत्व
१. अंकुर फूटना / प्रारंभिक पौध अवस्था : नाइट्रोजन , फॉस्फोरस, सल्फर, जिंक
२. पत्ती विकास अवस्था : नाइट्रोजन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक
३. कंद प्रारंभ अवस्था :⭐पोटैशियम, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, जिंक, बोरॉन
४. कंद विकास / भराव अवस्था : ⭐पोटैशियम, नाइट्रोजन, मैग्नीशियम, जिंक
५. पक्वता / कंद सख्ती अवस्था : पोटैशियम, मैग्नीशियम
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